लोकपाल के उस पार
घोटाले घोटाले है भारत में मौला,
देखो आज अन्ना की टोप पहन निकला जनता का ये टोला...
कदम कदम बढे चले, देश भक्ति की इस डोर में,
देखो मशाले जल उठी, शांति के इस शोर में...
रंग-बिरंगे चहरे यहाँ, देखो ये खेले यहाँ जन-होली,
उतार फैकने को मुखोटे, देखो आई यहाँ जन-गण की टोली...
है प्रशन कई, पर लोकपाल का उत्तर उन्हें समझाए,
जो खुद को कहे जन-सेवक, फिर क्यों अपना जोकपाल बनाए...
बढे चले, बढे चले क्रांति की ओर,
मशाले देखो जल उठी, शांति का है अब ये शोर..
ये है ऐसा भारत जहां संसद है अष्ट-भोग थाली,
और जनता है यहाँ बिल्कुल खाली...
सांसद नहीं ये जनता के सेवक है,
फिर क्यों बने ये ऐसे जैसे देश के ये कोई शासक है...
सांसद है ऐसे जिनकी कर्कश है बोली,
देखो आज अन्ना की टोप पहन निकली जनता की टोली... निकली जनता की टोली...
तिरंगो की यहाँ भीड़ है,
जनता का हौसला जिसकी रीड है...
आज ना खेलो बिल संग आँख में चोली,
देखो आज निकली अन्ना की ये टोली...
मैं भी अन्ना, तू भी अन्ना, देश की अब एक ही बोली,
उतार फैकने को मुखोटे, देखो आई यहाँ जन-गण की टोली...
-सारांश जैन
thank you...
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